नाम ध्यान सब भूली मैं तो,
तुझसे मेरी प्रीत है अब तो ,
ना कोई मेरा संगी साथी ,
जो है तू ही होय,
यम नियम मैं क्या पहचानु
मैं जानु तेरी प्रीत गुरुवर,
ना कोई मेरा शुभ अशुभ हैं ,
जो हैं तू ही होय,
प्रेम का ऐसा पाठ पढ़ा हैं ,
ना कुछ भाये और जगत में,
तुझसे मेरी प्रीत हैं अब तो ,
जो है तू ही होय,
मंदिर,तीर्थ कहीं ना जाना ,
तेरे चरणों में मेरा ठिकाना,
में जानु तेरी प्रीत गुरुवर,
जो है तू ही होय,
ज्ञान वैराग मैँ कुछ ना जानु,
राग मैँ तेरे अश्रु बहाऊ,
तुझसे मेरी प्रीत हैं अब तो ,
जो हैं तू ही होय,
दर्शन दो मेरे नाथ मुझे अब,
वो ही प्राण हैं इस जोगन के,
मैँ जानु तेरी प्रीत गुरुवर,
जो हैं तू ही होय,
तुझसे मेरी प्रीत है अब तो ,
ना कोई मेरा संगी साथी ,
जो है तू ही होय,
यम नियम मैं क्या पहचानु
मैं जानु तेरी प्रीत गुरुवर,
ना कोई मेरा शुभ अशुभ हैं ,
जो हैं तू ही होय,
प्रेम का ऐसा पाठ पढ़ा हैं ,
ना कुछ भाये और जगत में,
तुझसे मेरी प्रीत हैं अब तो ,
जो है तू ही होय,
मंदिर,तीर्थ कहीं ना जाना ,
तेरे चरणों में मेरा ठिकाना,
में जानु तेरी प्रीत गुरुवर,
जो है तू ही होय,
ज्ञान वैराग मैँ कुछ ना जानु,
राग मैँ तेरे अश्रु बहाऊ,
तुझसे मेरी प्रीत हैं अब तो ,
जो हैं तू ही होय,
दर्शन दो मेरे नाथ मुझे अब,
वो ही प्राण हैं इस जोगन के,
मैँ जानु तेरी प्रीत गुरुवर,
जो हैं तू ही होय,
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