Tuesday, 20 August 2013

SHAADI (शादी )

एक दिन मेरे दोस्त ने शादी न करने की इच्छा बताई ,
तो मेने उसकी सोच पे अपने मन की चिंता जताई  ।

मेने कहा तुमने क्यूँ न शादी करने की कसम खाई ,
तुम भी तो बनो किसी के घर के जमाई  ।

सब की तरह तुम भी अपना घर बसाओ, 
जैसा भी हैं शादी का लड्डू तुम भी खाओ  ।

वह बोला तुम शादी की इतनी सिफ़ारिश क्यूँ करती हो ,
लगता हैं तुम शादी करके बहुत सुखी हो  ।

मैं बोली मेरी बात को तुम मान नहीं पाओगे ,
बिना शादी किये शादी के सन्दर्भ को जाँच नहीं पाओगे  ।

जैसे बिना अनुभव किये आत्मा का ज्ञान नहीं होता ,
वैसे बिना शादी किये जीवन का अनुमान नहीं होता  ।

तुम भी शादी करके बिना आव़ाज का डमरू बन के देखलो, 
बिना शादी किये पछताने से क्या फायदा, शादी करके पछताके देख लो  ।

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