एक दिन मेरे दोस्त ने शादी न करने की इच्छा बताई ,
तो मेने उसकी सोच पे अपने मन की चिंता जताई ।
मेने कहा तुमने क्यूँ न शादी करने की कसम खाई ,
तुम भी तो बनो किसी के घर के जमाई ।
सब की तरह तुम भी अपना घर बसाओ,
जैसा भी हैं शादी का लड्डू तुम भी खाओ ।
वह बोला तुम शादी की इतनी सिफ़ारिश क्यूँ करती हो ,
लगता हैं तुम शादी करके बहुत सुखी हो ।
मैं बोली मेरी बात को तुम मान नहीं पाओगे ,
बिना शादी किये शादी के सन्दर्भ को जाँच नहीं पाओगे ।
जैसे बिना अनुभव किये आत्मा का ज्ञान नहीं होता ,
वैसे बिना शादी किये जीवन का अनुमान नहीं होता ।
तुम भी शादी करके बिना आव़ाज का डमरू बन के देखलो,
बिना शादी किये पछताने से क्या फायदा, शादी करके पछताके देख लो ।
Wah kya kavita hai.....
ReplyDeletethanks mr money doot ji
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